एक सुराग पर पकड़ा जाएगा डमी कैंडिडेट: RPSC ने की तैयारी; इंटरव्यू-वेरिफिकेशन में होगा ट्रायल, फिर एग्जाम सेंटर होगी लागू
राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) अब प्रतियोगी परीक्षा के सेंटर पर बायोमेट्रिक से वेरिफिकेशन लागू करने की तैयारी कर रहा है। हालांकि ट्रायल के तौर पर यह व्यवस्था इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के दौरान शुरू की जा रही है। इसके बाद सभी भर्ती परीक्षाओं पर लागू किया जा सकता है। खास बात यह है कि बायोमेट्रिक सिस्टम को अभ्यर्थियों के आधार कार्ड से लिंक किया जाएगा। दरअसल, हाल ही में एसओजी ने 50 से ज्यादा डमी कैंडिडेट को पकड़ा था। इसके बाद आरपीएससी ने इस पर अंकुश लगाने के लिए ये कदम उठाया है। आयोग का दावा है कि बायोमेट्रिक से डमी कैंडिडेट को आसानी से रोका जा सकता है। यह सिस्टम कैसे काम करेगा? कौन-कौन सी परीक्षाओं पर कब से लागू होगा। केंद्रीय मंत्रालय से मिल चुकी है मंजूरी आरपीएससी ने परीक्षा में बायोमेट्रिक
व्यवस्था लागू करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रोद्यौगिकी मंत्रालय को प्रस्ताव बनाकर भेजा था। 18 सितंबर
को मंत्रालय की ओर से आधार कार्ड के जरिए कैंडिडेट के बायोमेट्रिक
वेरिफिकेशन की परमिशन मिल गई है। आयोग सचिव रामनिवास मेहता ने बताया- 6 महीने से इसके लिए प्रयासरत
थे। आयोग के आग्रह पर राज्य सरकार के कार्मिक विभाग ने 8 मई 2024 को इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रोद्यौगिकी मंत्रालय, भारत सरकार को इस संबंध में लिखा था। इस पर 'भारत सरकार ने आधार एक्ट 2016 की धारा-4 एवं
आधार ऑथेंटिकेशन फॉर गुड गवर्नेस नियम 2020 के अंतर्गत अभ्यर्थियों की पहचान सत्यापित करने के उद्देश्य से आधार से सत्यापन की अनुमति दी है।
मेहता ने बताया कि कार्डधारक आइडेंटिटी सत्यापित करने के लिए एक ऑनलाइन बायोमैट्रिक (फिंगर, फेस, आईरिस) वेरिफिकेशन की सुविधा प्रदान करता है। दरअसल,आरपीएससी में आवेदन करने वाले अभ्यर्थी को वन टाइम रजिस्ट्रेशन में अपना आधार नंबर भरना पड़ता है। वहीं से अभ्यर्थी का नाम, पता, जन्म तिथि और अन्य जानकारियां एसएसओ के रिकॉर्ड में आ जाती हैं। अब जब भी आवेदन करने वाला अभ्यर्थी एग्जाम सेंटर पर पहुंचेगा। उसे बायोमैट्रिक मशीन पर थंब इंप्रेशन स्कैन करना होगा। इसके बाद ही एंट्री दी जाएगी। इस प्रोसेस के दौरान जैसे ही कैंडिडेट अपनी फिंगर स्कैन के लिए बायोमैट्रिक मशीन पर रखेगा, उसके 12 नंबर के आधार कार्ड के साथ उससे जुड़ी सभी जानकारी आ जाएगी। अगर कोई डमी कैंडिडेट किसी और की जगह एग्जाम देने पहुंचेगा तो अपने आप ही
पकड़ा जाएगा। क्योंकि फिंगर प्रिंट मैच नहीं होंगे।
अभी इंटरव्यू और डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन
में लागू
आयोग के सचिव रामनिवास मेहता ने बताया कि कार्मिक विभाग की ओर से नोटिफिकेशन जारी कराने की कवायद शुरू कर दी है। कार्मिक विभाग का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद इस व्यवस्था को पूर्ण रूप से लागू कर दिया जाएगा। ट्रायल के तौर पर यह व्यवस्था इंटरव्यू और डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन के दौरान लागू होगी। परीक्षा में पास होने वाला अभ्यर्थी इंटरव्यू देने पहुंचेगा तब उसे बायोमैट्रिक पर फिंगर प्रिंट स्कैन करना होगा। इससे ये पता लगाया जाएगा कि जिस कैंडिडेट ने एग्जाम दिया है वह कहीं डमी कैंडिडेट तो नहीं। इंटरव्यू तक पहुंचने वाले डमी अभ्यर्थियों पर लगाम लगेगी। RAS के इंटरव्यू तक गए थे डमी कैंडिडेट, इसलिए पड़ी जरूरत दरअसल, प्रदेश में पेपर लीक के साथ-साथ डमी कैंडिडेट भी आयोग के लिए मुसीबत बन चुके हैं। हाल ही में पेपर लीक प्रकरणों में एसओजी की कई गिरफ्तारियों में सामने आया कि कई डमी आरएएस का इंटरव्यू तक दे चुके हैं।दौसा के नांगल राजावतान का रहने वाले ग्रेड थर्ड रोशन मीणा पर एसओजी ने पकड़ा था। उससे पूछताछ में पता चला कि वह डमी कैंडिडेट बनकर दो बार प्री व मेन पास करने के बाद इंटरव्यू तक पहुंच गया था। हालांकि इंटरव्यू में फेल हो जाने के कारण उसका सिलेक्शन नहीं हो सका। ऐसे में डमी कैंडिडेट पर नकेल कसने के लिए यह कवायद की जा रही है। रोशन लाल मीणा कई बार आयोग के सिस्टम को चकमा दे चुका है। आयोग को उम्मीद है कि अब ऐसे डमी कैंडिडेट आसानी से पकड़े जाएंगे।
जुलाई 2024 में उदयपुर में RAS परीक्षा
देने आई एक डमी कैंडिडेट पकड़ी
गई
थी। ने डमी कैंडिडेट बनकर आई युवती को गिरफ्तार कर पूछताछ की। युवती से फर्जी प्रवेश पत्र और फर्जी कार्ड मिला था।पहले कई बदलाव आयोग आयोग की ओर से परीक्षाओं की गोपनीयता भंग करने और जालसाजी करने वाले व्यक्तियों व नकल गिरोहों पर लिए आवेदन लेकर एग्जाम में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।इनमें वन टाइम रजिस्ट्रेशन के दौरान लाइव फोटो कैप्चर, परीक्षा प्रवेश पत्र पर सिक्योरिटी थ्रेड, क्यूआर कोड, अभ्यर्थी की अंगूठा निशानी एवं हस्तलेख लेना शुरू किया है। इसके साथ ही ओएमआर शीट में पांचवां विकल्प एवं इंटरव्यू में टोकन के माध्यम से बोर्ड आवंटन जैसी विशेष प्रक्रियाएं सम्मिलित है। मेहता ने बताया- आधार बायोमैट्रिक सत्यापन सुविधा प्राप्त होने से आयोग अब और अधिक सशक्त हो सकेगा और जालसाजी कर परीक्षाओं में सम्मिलित होने प्रयास करने वाले व्यक्तियों की रोकथाम प्रारंभिक स्तर पर ही संभव हो सकेगी। अब चरणबद्ध रूप से अभ्यर्थियों की बायोमैट्रिक सत्यापन व्यवस्था आयोग ओर से शुरू की जाएगी।
