शिक्षा मनोविज्ञान की परिभाषाए
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1) क्रो व क्रो :- शिक्षा मनोविज्ञान जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक सीखने के अनुभव का एक योग है।
(2) स्किनर:- शिक्षा मनोविज्ञान, मनोविज्ञान की वह शाखा है। जो शिक्षण व अधिगम से सम्बन्धित है।
(3) पीट :- शिक्षा मनोविज्ञान शिक्षा का विज्ञान है।
[4] कोलसनिक ः- मनोविज्ञान की खोजो को शिक्षा में लागू करना ही शिक्षा मनोविज्ञान है।
[5] स्टीफन :- शिक्षा मनोविज्ञान, शैक्षिक विकास का एक क्रमबद्ध अध्ययन है।
[6] मैक्डुग्ल:- शिक्षा और मनोविज्ञान दोनों एक ही सिक्के दो पहलू है।
[7] महात्मा गाँधी :- आत्म निर्भरता शिक्षा का तात्कालिक उद्देश्य होना चाहिए।
[8] फ्रेण्डसन :- आधुनिक शिक्षा का सम्बन्ध, व्यक्ति और समाज दोनों के कल्याण से है।
[9] जड़ :- जन्म से लेकर परिपक्वता तक व्यक्ति के व्यवहार में जो परिवर्तन होते है उन परिवर्तनो का अध्ययन, विवेचन और व्याखान जिस विज्ञान के द्वारा की जाती है वही शिक्षा मनोविज्ञान है।
🎯🎯 शिक्षा मनोविज्ञान के प्रमुख तथ्य :🎯🎯
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👉स्किनरः-(1) शिक्षा मनोविज्ञान का मानव व्यवहार है।
(2) शिक्षा मनोविज्ञान का नाभिक क्षेत्र बालक है।
(3) शिक्षा मनोविज्ञान खोज और निरीक्षण से प्राप्त किये गये तथ्यो का एक संग्रह है।
[4] शिक्षा मनोविज्ञान में संग्रहित ज्ञान को सिद्धान्तो का रूप दिया जा सकता है।
[5] शिक्षा को मनोविज्ञान आधार प्रदान करने का श्रेय शिक्षा मनोविज्ञान करती है।
[6] शिक्षा मनोविज्ञान शिक्षा की समस्याओं का समाधान वैज्ञानिक विधियों व सिद्धान्तों के माध्यम से करता है।
[7] शिक्षा मनोविज्ञान की प्रकृति वैज्ञानिक है क्योकि इसमें मानव व्यवहार का अध्ययन वैज्ञानिक विधियो, नियमो और सिद्धान्तो के माध्यम से किया जाता है।
[3] शिक्षा मनोविज्ञान गणित और विज्ञान की तरह एक विज्ञान नहीं है।
(१) शिक्षा मनोविज्ञान अपनी अध्ययन पद्धतियों में एक विज्ञान है।
[10] शिक्षा मनोविज्ञान अपने विकास की शैशवावस्था से गुजर रहा है।
[२] शिक्षा मनोविज्ञान का सम्बन्ध - शिक्षक, शिक्षण, बालक, कक्षा-कक्ष वातावरण आदि सभी से है।
[13] शिक्षा मनोविज्ञान केवल कक्षा-कक्ष तक सीमित नहीं है।
🎯🎯 शिक्षा मनोविज्ञान का महत्व :🎯🎯
शिक्षा मनोविज्ञान एक सामाजिक और व्यवहारिक विषय है इसलिए व्यक्ति और समाज दोनो के लिए उपयोगी है।
(1) स्किनरः- शिक्षा मनोविज्ञान का ज्ञान अध्यापक की तैयारी में नींव के पत्थर के समान कार्य करता है।
[2] स्किनरः- शिक्षा मनोविज्ञान में उन सभी सान और विधियो को शामिल किया जाता है जो शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने में अध्यापक की सहायता करता है।
(3) कुप्पुस्खामीः- शिक्षा मनोविज्ञान अध्यापक को अनेक अवधारणाएँ और पद्धतियाँ प्रदान कर अध्यापक की उन्नति में सहायता करता है।
[4] माण्टेसरीः- अध्यापक को प्रयोगात्मक मनोविज्ञान का जितना अधिक ज्ञान होगा वह उतना ही अधिक जानता होगा कि बालक को कैसे पढ़ाया जाए।
[5] थॉमस फुलरः- एक सफल अध्यापक वही जो अपने बालक का अध्ययन ठीक उसी प्रकार करता है जिस प्रकार वह अपने विषय का अध्ययन करता है।
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🎯🎯महत्व(1) बालक को जानना
(2) स्वयं को [अध्यापक] जानना
[3] बाल केन्द्रीत शिक्षा = बड़ी देन
(4) उचित शिक्षण विधियों व सहायक सामग्री का चयन
[5] पाठ्यक्रम में सकारात्मक बदलाव करना
[6] पारयतगत, व्यवसायिक और शैलिक निर्देशन व परामर्श में सहायक
(7) उचित समय सारणी के निर्माण
[8] कक्षा का विभाजन करना
[9] बालक में सृजनात्मकता या रचनात्मक प्रवृति को विकसित करना ।
[10] व्यक्तिगत विभिन्नताओं के अनुसार बालक को ज्ञान देना।
(11) विद्यालय के प्रबंधन व प्रशासन में उपयोगी है।
(12)मूल्याकंन की नई तकनीको व विधियो प्रदान करना
(13) कक्षा और विद्यालय और बालक की समस्याओं का समाधान करना
(14) शिक्षा के क्षेत्र मे नये अनुसंधान व प्रयोग करना ।
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भाग 2 भाग 4
